ऊतक (TISSUE)
कोशिकाओं का ऐसा समूह जो उत्पत्ति रचना तथा कार्य में समान होता है। ऊतक कहलाता है। पादप शारीरिक में ऊतक सब्द का प्रयोग सर्वप्रथम एन ग्रयू 1682 ने किया था। उतको के अध्यान को Histology कहा जाता है। विभाजन तथा उपविभजन की क्षमता के आधार पर पादप ऊतक दो प्रकार के होते है -
1- विभाज्योतक तथा मेरिस्टेन-
भ्रूणवस्था में पौधे की सभी कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता होती है लेकिन वृद्धि की विभिन्न अवस्थाओं में विभाजन शीलता का लक्षण केवल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह जाता है पौधे में उपस्थित ऐसे भ्रूनियक्षेत्र जिनकी कोशिकाओं में विभाजन की अपार क्षमता होती है विभाज्योताक अथवा मेरिस्टम क्षेत्र कहलाते हैं अतः मेरी स्टीम एक ऐसा स्थान नियत क्षेत्र है जिसकी कोशिकाएं सक्रिय रूप से विभाजित होती है पौंधो में कुछ ऐसे चिरस्थाई भ्रनियक्षेत्र होते हैं जिनकी कोशिकाएं लगभग अनिश्चित समय तक विभाजित होती है तथा नए उत्तक एवं अंग बनाती है।
भ्रूणवस्था में पौधे की सभी कोशिकाओं में विभाजन की क्षमता होती है लेकिन वृद्धि की विभिन्न अवस्थाओं में विभाजन शीलता का लक्षण केवल कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह जाता है पौधे में उपस्थित ऐसे भ्रूनियक्षेत्र जिनकी कोशिकाओं में विभाजन की अपार क्षमता होती है विभाज्योताक अथवा मेरिस्टम क्षेत्र कहलाते हैं अतः मेरी स्टीम एक ऐसा स्थान नियत क्षेत्र है जिसकी कोशिकाएं सक्रिय रूप से विभाजित होती है पौंधो में कुछ ऐसे चिरस्थाई भ्रनियक्षेत्र होते हैं जिनकी कोशिकाएं लगभग अनिश्चित समय तक विभाजित होती है तथा नए उत्तक एवं अंग बनाती है।
विभाजयोतकी कोशिकाओं के लक्षण
(Characteristics Of Meristematic Cells)
1- ये कोशिकाए प्राय संव्यासिय व सहततया व्यवस्थित होती है।इनमे अंत्रकोषिकी अवकाशों का आभाव होता है
2- ये अभिरंजकों से रंगने पर गहरा रंग प्रदर्शित करती है
3- इनका केन्द्रक सामान्य कोशिकाओं के केद्रक की तुलना में बड़ा होता है।
4- इनमे रिक्तिकाए अत्यंत सूक्ष्म अथवा अनुपस्थित होता है।
5- इनके जीव द्रव्य में संचित खाद्य पदार्थ माइटोकॉन्ड्रिया अंतः द्रव्यी जाल एवं प्लेस्टाइड्स अल्प मात्रा में अथवा अनुपस्थित होते है।
1- ये कोशिकाए प्राय संव्यासिय व सहततया व्यवस्थित होती है।इनमे अंत्रकोषिकी अवकाशों का आभाव होता है
2- ये अभिरंजकों से रंगने पर गहरा रंग प्रदर्शित करती है
3- इनका केन्द्रक सामान्य कोशिकाओं के केद्रक की तुलना में बड़ा होता है।
4- इनमे रिक्तिकाए अत्यंत सूक्ष्म अथवा अनुपस्थित होता है।
5- इनके जीव द्रव्य में संचित खाद्य पदार्थ माइटोकॉन्ड्रिया अंतः द्रव्यी जाल एवं प्लेस्टाइड्स अल्प मात्रा में अथवा अनुपस्थित होते है।
स्थाई ऊतक - विभाज्योतकी ऊतक के विभाजन के व्युत्पन्न कोशिकाएं अंततः स्थायी ऊतक बनती है। स्थाई ऊतक का प्रमुख लक्षण विभाजन शीलता का आभाव है। इसकी कोशिकाएं जीवित अथवा मृत होती है स्थाओ ऊतक न्नलिखित तीन प्रकार के होते हैं-
1- सरल उतक ( Simple tissue)- ये उतक केवल एक ही प्रकार की कोशिकाओं से निर्मित होती है। इसकी कोशिकाएं जीवित या मृत होती है। तथा इनकी कोशिकाओं कि भित्तियां पतली या मोटी होती है। संरचना के आधार पर सरल उतक को निम्नलिखित तीन वर्गों में विभक्त किया गया है -
A- मृदूतक (Parenchyma)-
- यह ऊतक पौंधे के लगभग सभी अंगों का आधार बनता है
- यह मूल तथा स्तंभों के कॉर्टेक्स पिथ परिरंभ में पत्तियों के mesophyll मैं फलों के गूदे तथा बीजों के भ्रूण कोष मैं पाया जाता है
- इसके अतिरिक्त यह प्राथमिक व द्वितीयक संवहन उत्तक वह मजा किरणों का भी प्रमुख घटक है
- यह तक पतली कोशिका भित्ति वाली जीवित कोशिकाओं का बना होता है कोशिका भित्ति सैलूलोज की बनी होती है
- कोशिकाएं सन्यासी जैसे गोल अंडाकार या कोनिया होती है कोशिकाओं के मध्य अंतर आ कोशिकीय स्थान पाए जाते हैं मां
- पौधों की पत्तियों में इनके बीच यह स्थान नहीं पाए जाते हैं मृदु तकिया कोशिकाओं में एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका होती है मृ
- तक विभिन्न आवास रूपों तथा विशिष्ट कार्य से संबंधित अंगों में निवेदन दर्शाते हैं जलीय पौधों की मृत्यु तक में अंतर आ कोशिक अवकाश सबसे अधिक विकसित होते हैं इनमें पौधे के सभी अंतः कोशिका उकाश मिलकर एक सरल वतन तंत्र बनाते हैं इस उत्तर को बाय तक कहते हैं
- यह पौधों को उत्पला वक्ता प्रदान करता है जिन मृतकों में पर्णहरित उपस्थित होता है हरित लवक कहलाते हैं
- कुछ मृदु तकिया कोशिकाएं अनेक प्रकार के पाचन विकार स्रावित करते करने लगती हैं तब इन्हें इंडिया ब्लास्ट कहते हैं
मृदु तक के कार्य (functions of parenchyma)-
- यह भोज्य पदार्थों एवं जल का संग्रह करते हैं सा
- पौधों में इनकी आंसू न था यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है
- इनकी कोशिकाओं में जब हरित लवक उत्पन्न हो जाते हैं तब इन्हें क्लोरेंचायमा कहते हैं जो प्रकाश संश्लेषण में भाग लेते हैं
- जब इनकी कोशिकाओं के बीच बड़े बड़े वायु आशय बन जाते हैं तो इन्हें एरन काईमा कहते हैं और यह जलीय पौधों को प्रवक्ता प्रदान करते हैं
- कभी कभी इनकी कोशिकाएं विभाजित होकर घाव भरने का कार्य करती हैं।
B- स्थूलकोड़ ऊतक (Collenchyma)-
स्थूल्कोंड ऊतक के कार्य -
C- दृढोतक (Sclerenchyma) -
( functions and use of sclerenchyma)
- स्थूलकोड़ ऊतक एक विशेष प्रकार का यांत्रिक ऊतक है।
- यह सामान्यतः स्तंभ पति पुष्पा तथा फलों में पाया जाता है
- यह एक जीवित उत्तक है तथा इसमें पर्याप्त तनल सामर्थ होती है
- स्कूल कोड उत्तक प्राय बाह्य त्वचा अथवा कुछ मृदु तकी परतो के नीचे होता है।
- स्थूलकोंड उतक की कोशिकाएं बहुभूजी तथा कुछ लंबी होती है। इनकी पत्तियां कोनो प्रर स्थूलित होती है।
- यह स्थूलन सेल्यूलोज तथा पेक्टिन के कारण होता है। इसलिए इसे स्थूलकों ऊतक कहते है।
स्थूल्कोंड ऊतक के कार्य -
- यह पौधों को यांत्रिक दृढ़ता प्रदान करता है।
- कभी कभी यह प्रकाश संश्लेषण तथा भोजन संचय भी करता है।
- द्विबीजपत्री पौधों के तनो में यह हाइपॉडर्मिस का निर्माण करता है।
C- दृढोतक (Sclerenchyma) -
- दृढोतक मोटी भित्ति युक्त कठोर कोशिकाओं से निर्मित एक प्रकार का सरल उतक है।
- परिपक्व दृढोतक कोशिकाओं में गुहा बहुत छोटी होती है।
- तथा इनमें प्रोटोप्लास्ट अनुपस्थित होता है अतः यह कोशिकाएं जीवित होती हैं
- इनकी भित्तियो पर अत्यधिक लिखने जमा होता है। दृढोतक कोशिकाओं के आकार आमाप एवं उत्पत्ति में अत्यंत विविधता पाई जाती है
- यह पौधों को यांत्रिक शक्ति प्रदान करते हैं एवं पौधे के स्तंभ पत्तियों फलों के छिलके संवहन सिलेंडर में पाए जाते हैं।
( functions and use of sclerenchyma)
- यह उत्तक पौधों के अंगों को सत्य व यांत्रिक सहायता प्रदान करते हैं
- इनके तत्वों का प्रयोग रस्सी चटाई गद्दी आदि बनाने में किया जाता है
- इस उत्तक की कोशिकाएं मृत होती है और पानी की कमी वाले स्थानों में उगने वाले पौधों में यह बहुतायत में पाया जाता है
- इससे पौधे को जल की कम आवश्यकता होती है तथा वाष्प उत्सर्जन भी कम होता है





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