Class 12th Board Exam Science important notes
- मानव जनन (HUMAN REPRODUCTION)
मनुष्य में केवल लैंगिक जनन मिलता हैं। placental तथा एकलिंगी है। मनुष्य में नर तथा मादा जनन्नांग अलग - अलग जीवों मेलता हैं। आकरीकी में नर पुरुष तथा मादा महिला पृथक पृथक् पहचाने जते हैं। sexual dimorphism कहते हैं।
मादा प्रजनन क्रिया के अन्तर्गत निम्न चरण होते है -
1- युग्मक जनन - शुक्राणु तथा अंडाणु का निर्माण होता है।
2- निषेचन - शुक्राणु तथा अंडाणु का सनलय्यान होता है।
3- जाइजोट निर्माण - निषेचन के पश्चात जयगोट का निर्माण होता है।
4- पश्चनिषेचन निर्माण - जयगोत अथवा युग्मनज गर्भाशय की भित्ति से चिपककर भ्रूण व अंतः शिशु के रूप में विकसित हो जाते है।
नर जननाग - पुरुष में निम्न जनानाग मिलते हैं -
1- वृषण कोष - इसमें वृषण सुरक्षित रहते हैं।
2- वृषण - ये संख्या में दो होते हैं। इसमें शुक्राणु व नर लिंगहार्मॉन्न बनते हैं।
3- वाहिनियां - इनका का शुक्राणुओं को ले जाना होता है।
4- सहायक ग्रंथियां - प्रोस्टेट ग्रंथि कॉपर ग्रंथि लीटर ग्रंथो तथा शुक्रय्य प्रमुख नर ग्रंथियां हैं।
वृषण (TESTES) - पुरुष में लगभग 4 cm लंबे तथा 2.5cm मोटे दो वृषण मिलते हैं। वृषण के बाय आवरण के रूप में एक मोटा द्विस्तरीय वृषण खोल होता है बाहरी पतले आवरण को ट्यूनिका वैलेंसीज कहते हैं जबकि भितरी मोटे स्तर को ट्यूनिका अल्बूजीनिया कहते हैं ट्यूनिका अल्बूजीनिया में स्वेत तंतु के संयोजी उत्तक होते हैं यह संयोजी उत्तक लगभग 400 शुक्रवाकार पिंडो का निर्माण करती है प्रत्येक पिंड में दो या तीन अतिकुंडलित शुक्रजन नलिका होते हैं जो शुक्र जन कोशिकाओं में अर्धसूत्री विभाजन के फल स्वरुप शुक्राणु बनते हैं आदि वृषण ऊपरी छोर पर लगभग 6 मीटर पतली लंबी कुंडली नलिकाओं का जाल होता है जिससे अधिवृषण कहते हैं। यह शुक्राणुओं का पोषण का कार्य करता है।
मादा जनन तंत्र
स्त्री जनन तंत्र में मुख्य अंग निम्न है-
- एक जोड़ी अंडाशय
- वाहिनी तंत्र
- स्तन ग्रंथियां
- बाह्य जननांग
1- अंडाशय - यह संख्या में दो होती हैं जो उदर गुहा में स्थित होती हैं प्रत्येक अंडाशय बादामनुमा आकृति युक्त लगभग 3 सेंटीमीटर लंबी व 2 सेंटीमीटर मोटी संरचना होती है अंडाशय का प्रमुख कारण अंडोत्सर्ग होता है तथा इसमें स्त्री हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन स्रावित होते हैं
अंडाशय की आंतरिक संरचना - अंडाशय की सबसे बाहरी परत जनन एपीथिलियम कहलाती है तथा भीतरी भाग स्ट्रोमा कहलाती है स्ट्रोमा में रुधिर कोशिकाएं तंत्रिकायें तथा ग्राफियन फॉलिकल मिलते हैं ग्राफियन फॉलिकल कोशिकाओं का एक ऐसा समूह है जिसकी एक कोशिका तीव्रता से वृद्धि कर अंडाणु बनाती है शेष कोशिकाओं को फॉलिकुलर कोशिकाएं कहते हैं परिपक्व ग्राफियन फॉलिकल में बाहरी सतह मेंब्रेन ग्रेन्यूलोसा तथा मध्य में फॉलिकुलर गुहा पाई जाती है इसमें रंगहीन तरल भरा होता है फॉलिकुलर गुहा के अंदर स्थित होते हैं जिसके बाहर मोटी जों पेलूसिडा कोशिकीय स्तर होता है यह फोलीकिल परिपक्व होने पर अंडाशय की ऊपरी सतह पर आते हैं तथा अंडाणु युक्त कर देते हैं फॉलिकुलर गुहाए रक्त से भर जाती हैं फॉलिकुलर गुहाएं रक्त के थक्के के जम कॉरपस लुटियम बनाती है कॉरपस लुटियम पीले रंग की ग्रंथिल संरचना है जो प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन का स्राव करती है।
युग्मक जनन - वृषण तथा अंडाशय के जनन एपीथिलियम की कोशिकाओं में अर्धसूत्री विभाजन के फल स्वरुप युग्मक निर्माण की प्रक्रिया युग्मक जनन कहलाती है नर युग्मक शुक्राणुओं तथा मादा युग्मक अंडाणु कहलाती है।
अंडजनन - मादा स्तानियो में अंडाशय की जनन उपक्ला से उगोनिय बनती है उगोनिया के निरंतर शुक्राणु अर्धसूत्री विभाजन के प्राथमिक फिलीकिल बनता है प्राथमिक फॉलिकल में कोशिकाएं विभाजित होकर एक गोलाकार संरचना बनाती है इस संरचना में से कोई एक कोशिका तीव्र वृद्धि करके अंडाणु का निर्माण करती है यह प्रक्रिया अंडजनन कहलाती है।
आर्तव चक्र की प्रावस्थाए -
1- राजोस्राव प्रावस्था - प्रत्येक आवर्त चक्र का प्रारंभ योनि से होने वाले रक्त स्राव से होता है जो लगभग 5 दिनों तक चलता रहता है इस श्राव में कुछ उत्तक द्रव्य शलेश्य तथा गर्भाशय की शलेशमिका की कोशिकाओं के अतिरिक्त कुछ मात्रा रुधिर की होती है।
2- पूर्ण अंडोत्सर्गया प्रावस्था - यह प्रावस्था छठे दिन से 13 दिन के बीच होती है छठे दिन की पीयूष ग्रंथि के एस एस एच हार्मोन के प्रभाव से 20 वृद्धिसील पोटिकाओ में और अधिक वृद्धि होती है और इनसे एस्ट्रोजन हार्मोन का स्राव होने लगता है।
3- पश्च अंडोत्सर्गीय प्रावस्था - यह प्रावस्था 15 दिन से 28 वें दिन के मध्य होती है इसमें एलएच हॉरमोन के प्रभाव से फटी हुई ग्रंथियन पुटिका में कॉरपस लुटियम बन जाता है जो अल्प मात्रा में एस्ट्रोजन का तथा अधिक मात्रा में प्रोजेस्ट्रोन का श्रावण करता है।
मानव भ्रूण का विकास
मानव शरीर में शुक्राणु तथा अंडाणु का संलयन फैलोपियन नलिका में होता है जिसके फलस्वरूप युग्मनज जाइगोट बनता है इस प्रकार की निषेचन को आपातरिक निषेचन कहते हैं युग्मक बनने के पश्चात भ्रूण परिवर्धन निम्नवत होते हैं।



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