Genetics (मेंडल के नियम) Hindi में

 Biology notes 12th

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Genetics-
  • वंशागती तथा विविधता के सिद्धांत
        अनुवांशिकी या अनुवांशिकता

   लगभग सन् 1900  के आसपास अनुवांशिकी का विकास हुआ जबकि मंडल द्वारा सन 1857 ई0 में आनुवंशिकता के प्रयोग करते हुए कुछ नियम प्रतिपादित किए थे।

अनुवांशिक लक्षण-  वे लक्षण जो माता-पिता से अनेक संतानों तक पहुंचते हैं अनुवांशिक लक्षण कहलाते हैं
अनुवांशिकता- अनुवांशिक लक्षणों का माता-पिता से संतानों तक पहुंच कर स्वयं को प्रकट करने की क्रिया अनुवांशिकता कहलाती है।

अनुवांशिकी- (आनुवंशिक विज्ञान)- जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत अनुवांशिक लक्षण अनुवांशिकता कार्यकर्ताओं का अध्ययन किया जाता है अनुवांशिकी कहलाता है।

ग्रेगर जॉन मेंडल के अनुवांशिक विज्ञान का जनक कहते हैं इनका जन्म ऑस्ट्रेया में हुआ। 
      
   इन्होने मटर के पौधे पर प्रयोग करके अनुवांशिकता के सिद्धांत तथा नियम सन 1857 में प्रस्तुत किए मेंडल ने मटर पर कार्य का विवरण सन 1866 में के नाम से प्रस्तुत किए।

   सन 1901 में  कोरेंस सेमार्ग डिब्रिंग नामक वैज्ञानिक  मेंडल के प्रयोग से सत्य पाता तथा सन उन्नीस सौ एक से ही आनुवंशिक विज्ञान का उद्भव माना जाता है।


  • मटर 1 वर्षीय पौधा है 
  • मटर में विभिन्न में लक्षण स्पष्ट दिखाई देते हैं तथा यह लक्षण भली-भांति परिभाषित थे
  •  इन्हें आसानी से उगाया तथा क्रॉस किया जा सकता है 
  •  मटर का पुष्प संपूर्ण नर व मादा जननांग एक ही पुष्प में मिलते हैं
  •  यह आसानी से उगाए जा सकते हैं
  •  इन्हें आसानी से विंसन किया जा सकता है


मेंडल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे पर निम्न लक्षणों को चुना-


  • लंबे तथा बौने पौधे
  • हरे तथा पीले फल 
  • बीजी शोले का रंग सफेद तथा सिलिटी 
  • हरे या झुर्री दार बीज
  • लाल या सफेद पुष्प


जीनोटाइप- लक्षणों की जीन अभिव्यक्ति जिनोटाइप कहलाती है

फिनोटाइप - लक्षणों की भौतिक अभिव्यक्ति फ्लोटाइप कहलाती है

मेंडल ने तीन नियम प्रतिपादित किए-

1- प्रभाविता का नियम- जब एक जोड़ी शुद्ध विपरीत लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराया जाता है तो प्रथम पीढ़ी में केवल एक ही लक्षण प्रकट होता है प्रथम पीढ़ी में प्रकट होने वाले लक्षण प्रभावी लक्षण कहलाता है तथा जो लक्षण प्रथम पीढ़ी में प्रकट नहीं हो पाता उसे प्रभावी लक्षण कहते हैं यह प्रभाविता का नियम है।


2- पृथक्करण का नियम- जब एक जोड़ी शुद्ध विपरीत लक्षणों वाले शुद्ध पौधों के मध्य संकरण कराया जाता है तो प्रथम पीढ़ी में प्रभावी लक्षण प्रकट होता है किंतु दूसरी पीढ़ी में यह दोनों लक्षण पृथक पृथक होकर 1अनुपात 2 अनुपात 1के अनुपात में प्रकट होते हैं।


3- स्वतंत्र अपव्यूहान का नियम- जब 2 जोड़ी शुद्ध विपरीत लक्षणों वाले पौधों में संकरण कराया जाता है तो प्रथम पीढ़ी में जो प्रभावी लक्षण प्रकट होते हैं किंतु द्वितीय पीढ़ी में चारों लक्षण पृथक पृथक होकर युग्म बनाते हुए स्वयं को प्रकट करने का प्रयास करते हैं अर्थात स्वतंत्र रूप से अभिवहन करते हैं जिसमें लक्षणों का 9 अनुपात 3 अनुपात 3 अनुपात 1 का अनुपात होता है।

शंकर पूर्वज संकरण (back cross)- प्रथम जोड़ी में उत्पन्न संतति ओं का जब दोनों में से किसी एक जनन के साथ संकरण कराया जाता है तो उसे शंकर पूर्वज संकरण कहा जाता है सामान्य तथा प्रभावी लक्षणों के साथ प्रथम पीढ़ी का संकरण कराया जाता है।

(test cross) - जब प्रथम पीढ़ी में उत्पन्न पौधों का उनके प्रभावी जनक से संकरण कराया जाता है तो उसे परीक्षा अर्थ संकरण कहते हैं।

सह प्रभाविता-  जब विषमयुग्मजी एलील के दोनों एलील स्वयं को अभिव्यक्त करते हैं तो इसे से प्रभाविता कहते हैं जैसे रुधिर वर्ग एबी में दोनों एंटीजन का स्वयं को अभिव्यक्त प्रकट कर लेते हैं जो यह स्थिति से प्रभाविता कहलाती है यदि काली त्वचा के जंतु का संकरण हुई तो जीव के कराया जाता है तो इनके बछड़े चितकबरी स्पॉटेड त्वचा वाले उत्पन्न होते हैं तो 24 से प्रभाविता का उदाहरण है।

अपूर्ण प्रभाविता- कभी-कभी पूर्ण प्रभावित के अभाव में प्रत्येक जीव स्वयं को अभिव्यक्त कर लेते हैं जिसे अपूर्ण प्रभाविता कहते हैं जैसे गुलाबास मीराबिलिस जलापा में लाल पुष्प सफेद पुष्पा में संकरण कराने पर प्रथम पीढ़ी में पुष्प गुलाबी रंग के होते हैं जो द्वितीय पीढ़ी में 1 अनुपात 2 अनुपात 1 के अनुपात में लक्षण प्रकट करते हैं

वंशागति का गुणसूत्र सिद्धांत - सन 1902 में सड़न तथा वोबेरी ने वंशागति का गुणसूत्र सिद्धांत प्रस्तुत किया उन्होंने बताया कि मेंडल ने जिन्हें कारक कहा था वह वास्तव में जीन है जो गुणसूत्रों पर उपस्थित होते हैं तथा युग्मक बनाते समय प्रतीक समझा दो गुणसूत्रों की जोड़ी प्रथक प्रथक हो जाती है जिनमें से केवल 1 गुणसूत्र ही युग मत में पहुंचते हैं तथा निषेचन के समय नर व मादा युग्मक के केंद्रक पुनः संयोजित होकर समझाता गुणसूत्रों के रूप में विकसित हो जाते हैं।

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2 Comments

Unknown said…
Nice 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻