मानव मस्तिष्क की संरचना
(Structure of Human Brain)
मस्तिष्क (Brain)- मानव मस्तिष्क अन्य सभी प्राणियों के मस्तिष्क से अधिक विकसित होता है
- एक औसत बाहर के व्यक्ति के मस्तिष्क का भार लगभग 1.4 किलोग्राम होता है
- यह हस्तियों से बनी कटोरी में बंद रहता है
- करोति बहाया घाटों से मस्तिष्क की रक्षा करती है
- करौली के अंदर की ओर तथा मस्तिष्क के बाहर चारों ओर संयोजी उत्तक की बनी तीन झिल्लियां या पाई जाती है
मानव का मस्तिष्क द्विपार्शव सममित होता है। यह बाहर से अखरोट जैसा दिखाई देता है अध्ययन की सुविधा के लिए इसे तीन भागों में बांटा जा सकता है-
1- अग्र मस्तिष्क (Prosencephalon)
2- मध्य मस्तिष्क (Mesencephalon)
3-पश्च मस्तिष्क (Rhombencephalon)
1- अग्र मस्तिष्क (Fore Brain)- यह सर्वाधिक विकसित एवं पूरे मस्तिष्क का लगभग 80% भाग होता है यह दाहिने एवं बाय प्रमस्तिष्क गोलार्ध का बना होता है दो हेमिस्फेरिक तंत्रिका तंतु ओं की एक पट्टी द्वारा एक दूसरे से जुड़े रहते हैं जिसे कॉरपस कॉलसम कहते हैं प्रत्येक प्रमस्तिष्क गोलार्ध तीन गहरी दरारों द्वारा चार पारियों में बैठा रहता है।
प्रमस्तिष्क के कार्य (function of cerebrum)
- फ्रंटल पिंड क्रियात्मक विचारों को नियंत्रित करता है
- टेंपोरल पिंड श्रवण संवेदनाओं को प्राप्त करता है
- ऑक्सी पिटाइल पिंड दृष्टी संवेदना को प्राप्त करता है
- पैराइटल पिंडबोर्ग अनुभव जैसे स्पर्श गर्म ठंडा दर्द चुभन आदि की संवेदनाएं ग्रहण करता है
हाइपोथैलेमस (Hypothelemous)
यह डाई एनेसेफेलोन की दीवारों का निचला भाग तथा डायोसील का फर्श बनाता है। इसमें तंत्रिका कोशिकाओं के लगभग एक दर्जन बड़े बड़े केंद्रक होते हैं इसमें एक द्रिक किआज्मा होता है।
हाइपोथैलेमस के कार्य -
- यह पीयूष ग्रंथि से जुड़ा होने के कारण तंत्रिका तंत्र को अंतः स्रावी तंत्र से जोड़ने का कार्य करता है
- इसकी तंत्रिका स्रावी कोशिकाएं मोचन व निरोधी नामक न्यू हार्मोन का श्रावण करती है जो पीयूष ग्रंथि की श्रावण की क्रिया को नियंत्रित करते हैं
- इसकी तंत्रिका स्रावी कोशिकाएं वेसोप्रोसिन एडीएच ऑक्सीटॉसिन नामक हारमोन का निर्माण करती है जो पीयूष ग्रंथि से रक्त से संचारित होते हैं
- इसमें स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के केंद्रक पाए जाते हैं जो भूख प्यास प्रेम घृणा नींद संतुष्टि भावना वृत्ति क्रोध संभोग प्रसन्नता आदि को नियंत्रित करते हैं
- यह शरीर के ताप को नियंत्रित करता है
- यह शरीर में सम स्थापन की स्थिति को बनाए रखता है
नोट - पीयूष ग्रंथि पर नियंत्रण के कारण हाइपोथैलेमस को अंत स्रावी नियमन का सर्वोच्च कमांडर या प्रधान ग्रंथि का नियंत्रक कहते हैं
2- मध्य मस्तिष्क (Mid Brain)
- यह मस्तिष्क का अपेक्षाकृत छोटा भाग है जो डाईएनेसेफेलोन के पीछे प्रमस्तिष्क के नीचे तथा पश्च मस्तिष्क के ऊपर स्थित होता है।
- इसकी गुहा अत्यधिक संकरी होती है जिसे i-touch वा सिल्वर्सकी एक्वेडक्ट कहते हैं।
- मध्य मस्तिष्क के ऊपरी द्रिक पिंड दृष्टि से संबंधित प्रतिवर्ती केंद्र है जबकि निचले द्रिक पिंड श्रावण संबंधी प्रतिवर्ती केंद्र है।
3- पश्च मस्तिष्क(Hind brain)
- यह स्तनधारियों के मस्तिष्क का सबसे अधिक विकसित तथा दूसरा बड़ा भाग है।
- इसका बाहरी भाग ग्रे मैटर से बना होता है। जो अनुमस्तिष्क वल्कुट कहलाता है
- अनु मस्तिष्क में 3 पिंड पाए जाते हैं मध्य पिंड को वर्णित कहते हैं जो श्वेत द्रव्य का बना होता है इसके दोनों पार्श्व भागों में दो बड़े पार्श्व पिंड पाए जाते हैं
अनुमस्तिष्क के कार्य -
- यह प्रेम मस्तिष्क द्वारा प्रेरित ऐच्छिक गतिविधियों से जुड़ी पेशियों के बीच नियंत्रण और समन्वय करता है।
- यह समस्त कंकाली पेशियों को नियंत्रित कर चलने फिरने दौड़ने लिखने आदि क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
- यह शरीर में संतुलन व साम्यावस्था स्थापित करता है।
पॉस वेरोलाई (Pons Varolli)
- यह छोटा परंतु अत्यधिक महत्वपूर्ण भाग है जो अनुमस्तिष्क वृंतो के नीचे व मेडयुला आब्लोगेटा के ठीक ऊपर पाया जाता है
- ये अनुमशतिक्स के दोनों पार्श्व पिंडों को जोड़ता है।
- ये मस्तिष्क के अन्य भागो को भी एक दूसरे से जोड़ने का कार्य करता है।
- ये श्वेत द्रव्य के बने होते है।
कार्य -
- यह मेडयुला आब्लोगेटा व मस्तिष्क के अन्य भागो के बीच चलन पथ बनाता है।
- यह चबाने लार श्रावण नेत्रों की गति व आंसू निकलने की प्रक्रिया में मध्यवर्ती नियंत्रक का कार्य करता है।
- इनमे शवासानुचलन केंद्र पाया जाता है जो संवत् क्रिया को नियंत्रित करता हैं।
मेडयुला आब्लोगेटा (Medulla Oblngata)
- यह शरीर के समस्त अनेच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। जैसे - हृदय, स्पंदन, आहारनाल का क्रमानुकुंचन, निगलना, वमन आदि
- इन सभी क्रियाओं के केंद्र मेडयुला आब्लोगेटा में उपस्थित होते है।






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