अमेरिका और ईरान के रिश्ते पिछले कई दशकों से दुनिया की सबसे जटिल और तनावपूर्ण दुश्मनी में से एक रहे हैं। यह रिश्ता "दोस्ती से कट्टर दुश्मनी" तक पहुँचने की कहानी है।
यहाँ इसके मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
1. इतिहास: दोस्ती से दुश्मनी तक
- 1979 से पहले: अमेरिका और ईरान के बीच बहुत अच्छे संबंध थे। ईरान के राजा (शाह) अमेरिका के करीबी सहयोगी थे।
- 1979 की क्रांति: ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और शाह को देश छोड़ना पड़ा। इसके बाद तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया गया और 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। यहीं से दोनों देशों के रिश्ते पूरी तरह टूट गए।
2. मुख्य विवाद के कारण
दोनों देशों के बीच दुश्मनी के कुछ बड़े कारण ये हैं:
- परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका को डर है कि ईरान परमाणु बम बना सकता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों (बिजली बनाने) के लिए है।
- क्षेत्रीय प्रभाव: अमेरिका का मानना है कि ईरान मध्य पूर्व (Middle East) में अस्थिरता फैलाता है और हिजबुल्लाह जैसे समूहों की मदद करता है।
- प्रतिबंध (Sanctions): अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर कड़े प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिससे ईरान में महंगाई और आर्थिक मुश्किलें बढ़ गई हैं।
3. हालिया बड़े घटनाक्रम
- 2015 न्यूक्लियर डील (JCPOA): ओबामा प्रशासन के दौरान एक समझौता हुआ था कि ईरान अपना परमाणु काम कम करेगा और अमेरिका प्रतिबंध हटाएगा।
- ट्रम्प का बाहर निकलना (2018): पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समझौते से बाहर निकल गए और फिर से कड़े प्रतिबंध लगा दिए।
- कासिम सुलेमानी की मौत (2020): अमेरिका ने एक ड्रोन हमले में ईरान के टॉप कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया, जिससे दोनों देश युद्ध की कगार पर पहुँच गए थे।
4. वर्तमान स्थिति
आज के समय में भी रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। इजरायल-हमास युद्ध ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है, क्योंकि अमेरिका इजरायल का समर्थन करता है और ईरान हमास का। दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत के रास्ते लगभग बंद हैं और वे अक्सर तीसरे देशों (जैसे कतर या ओमान) के जरिए संदेश भेजते हैं।
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